
यह दावा कि हनुमान चालीसा में पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी का उल्लेख है, पूरी तरह से मिथ्या है। यह भ्रामक जानकारी “जुग सहस्त्र योजन पर भानु” श्लोक की गलत व्याख्या से उत्पन्न हुई है, जिसका अर्थ है “हनुमान ने कई योजन (प्राचीन माप इकाई) की दूरी तय कर सूर्य तक पहुँच बनाई।” यह अनुवाद पूरी तरह से गलत है। ऐसी निराधार बातों पर विश्वास करना तुलसीदास जी और हनुमान जी के प्रति गहरा अनादर है।

यदि आप केवल गीताप्रेस की हनुमान चालीसा पढ़ें, तो सत्य आपके सामने स्पष्ट हो जाएगा…

तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना भक्तों के हृदय में श्रद्धा और भक्ति जागृत करने के लिए की थी, न कि वैज्ञानिक तथ्यों को प्रस्तुत करने के लिए। ऐसी मिथ्या व्याख्याएं करना उनके प्रति अज्ञानता और अनादर है।
वास्तविकता जानने के लिए, हमें मूल ग्रंथों और उनकी सही व्याख्या पर ध्यान देना चाहिए। यह हमारा कर्तव्य है कि हम किसी भी धार्मिक ग्रंथ की पवित्रता को गलत धारणाओं से दूषित न होने दें। यदि आप हनुमान चालीसा के सच्चे अर्थ को समझना चाहते हैं, तो तुलसीदास जी की रचनाओं को सही संदर्भ में पढ़ें।
विस्तार से जानने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को अवश्य देखें, जो इस भ्रम को स्पष्ट करेगा।
